Monthly Archives: February 2019

की शान

हम तो खजाना नही मांगते ,हमको हक का दाम चाहिए।
आँख मिचौली बन्द करो अब, आर तो या फिर पार चाहिए।
हमको दया का पात्र न समझो, हमको तो सम्मान चाहिए।
सूट-सफारी भले न हो, पर धोती-कुर्ता साफ चाहिए।
कर्ज की माफी नही मांगते, कर्ज से हमको मुक्ति चाहिए।

मंडी ना बाजार चाहिए, मंदड़ियों से निजात चाहिए।
माघ में गर्मी देने वाली, रुपयों की थोड़ी ताप चाहिए।
हमको नौकर नही चाहिए, खुद के खेत मे काम चाहिए।
खुद के खेत के काम का हमको, पूरा-पूरा दाम चाहिए।
कर्ज की माफी नही मांगते, कर्ज से हमको मुक्ति चाहिए।

प्याज के आँसू रोने वालो, तुमको थोड़ा ज्ञान चाहिए।
वो तो मेरे ही आँसू है, जिनको तुम्हारी आँख चाहिए।
पीड़ा मेरे प्राण न हर ले, मुझको ऐसी ढाल चाहिए।
उखड़ रही इन साँसों को, मान का थोड़ा दान चाहिए।
कर्ज की माफी नही मांगते, कर्ज से हमको मुक्ति चाहिए।

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© Arvind Maurya

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नीति

नीति नियंता नीति बनाते,

देश काल को दिशा दिखाते।

कहते धुरी राष्ट्र की हम है।

साख हमारी हम ही हम है।

पर यह भूल भयंकर भारी।

नीति देश को नही बनाती।

नियति और नैतिकता के बिन,

नीति पड़े-पड़े सुस्ताती।

इंतजार करती नियति का,

नैतिकता को पास बुलाती।

जब संयोग हुआ तीनो का,

छठा सुहानी बड़ी सुहाती।

गति राष्ट्र को ऐसी मिलती,

जैसे आँधी कोई तूफानी।

जन जन में उत्साह छलकता।

जैसे शावक कोई उछलता।

मिल कर सब तन-मन और धन से,

योगदान अपना देते ।

राष्ट्र और अपने विकास को,

सर्वस्व सभी अर्पित करते।

तभी एक भूमि का टूकड़ा,

सच मे राष्ट्र कहलाता है।

अपने स्वावलंबी जन पर,

फूला नही समाता है।

जन गण मन अधिनायक जय का,

गान तभी यह गाता है।

आगे बढ़ता जाता है,

बस आगे बढ़ता जाता है।

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© Arvind Maurya