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क्या सही, क्या गलत ?

क्या सही क्या गलत का फरक
जाने देखने वाले कि नजर
क्या बयान देती है ये हलक
करके साजिश जुबा से मिलकर
क्या सही क्या गलत क्या सही क्या गलत

बंद आँखों के कर के पटल
सख्त तालों से दिल को जकड़
पालता फिर रहा है भरम
जीत जाएगा कल सारा जग
है भरम, कर शरम, जा समझ, क्या सही.. क्या गलत..

झूठ ही झूठ है हर तरफ
सत्य खोजता है खुदको दर-बदर
रार कर, हार कर, खुदको गुमराह कर
चल पड़ा है उस डगर, जिसपे झूठ राहबर
क्या सही क्या गलत क्या सही क्या गलत

खुदसे से खुदको मारकर, खुद पे खुदको लादकर
सत्य की लाश में, झूठ के प्राण भर
प्राण के भार सह, जिंदा लाश बन कर
सब्र को बाँध कर, साँसों को साधकर
चल रहा हूँ किधर ना पता, क्या सही.. क्या गलत..

जिंदा लाश बन कर, लाश के प्राण बन
चल रहा राह पर, मर रहा राह पर
अब न कोई है डर, न ही कोई भरम
गलत भी सत्य है, सत्य भी है गलत
क्या सही क्या गलत क्या सही क्या गलत

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© Arvind Maurya

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