दुष्चक्र

जब से जितेन ने यह नौकरी पकड़ी है तब से उसकी जिंदगी नरक सी बन गई है। आफिस से घर जाते वक्त जितेन अपनी नौकरी और जिंदगी के बारे में सोच रहा है- “सुबह से लेकर देर रात तक गदहे की तरह काम करो फिर भी जिंदगी तंगहाल हो तो ऐसा काम करने का क्या फायदा। बचपन मे पढ़ाई खेलना कूदना छोड़कर मेहनत से पढ़ाई लिखाई किया ताकि जवानी में मजे करेंगे भले ही बचपन थोड़ा फिका हो जाए तो क्या। ये दिन देखने के लिए थोड़े ही इतनी मेहनत की और आज भी कर रहे है। पहले सोचते थे पढ़ लिख लेंगे, नौकरी करेंगे, सम्मान मिलेगा। घंटा सम्मान मिल रहा है। सम्मान के नाम पर ऑफिस का चपरासी दिन भर में एक दो बार चाय पूछ जाता है। इसके अलावा जो खातिरदारी होती है वो तो बताने लायक भी नही है। अब मैं निश्चय करता हूँ कि ये नौकरी छोड़ दूँगा। ये ओहदा मेरे लिए बना ही नही है।

घर पहुंचते पहुंचते जितेन थक कर चूर हो जता है।घर पहुंचते ही सोफे के सामने पड़े मेज पर मोबाइल निकालकर फेंकता है और निढाल होकर धड़ाम से सोफे पर लेट जाता है। अब भी जितेन के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रहीं है। बालों पर हाथ फेरते हुए, एक गहरी साँस लेकर छोड़ता है और लेटे-लेटे ही पैर से पैर के जूते निकालने का प्रयास करता है। जूता निकालने के लिए वो थोड़ा संघर्ष करता है। क्योंकि जूता नही निकलता है, इसीलिए उसका चेहरा और तमतमा जाता है।

थोड़े संघर्ष के बाद एक पैर का जूता आधा निकलता है तो उसके चेहरे पर हल्की राहत भरी मुस्कान फैल जाती है, मानो कोई जंग जीत गया हो।ठीक उसी वक़्त मेज पर रखा उसका फ़ोन बज उठता है। फ़ोन मेज पर कंपन (वाइब्रेट) करते हुए जैसे ही बजता है, वैसे ही जितेन की मुस्कान सिकन में तब्दील हो जाती है।जितेन सोफे पर लेटे लेटे ही लापरवाही से फ़ोन उठाकर, “हेलो कौन है?” दूसरी तरफ से एक भारी आवाज उसकी बात बीच मे ही काट कर बोलती है – ” खामोश….मेरी बात ध्यान से सुनो। आज तुम्हारी किस्मत तुमसे भीख माँगने आई है और तुमको चुनना है कि तुम उसको कितना दे सकते हो।

जितेन का इतना सुनना था कि उसके कान खड़े हो गए। वो पलक झपकते ही उठ कर बैठ गया। वह ज्यों ही उठा उसका जूता जोकि आधा निकला था, जाकर एक फूलदान पर लगता है। फूलदान गिरकर टूकड़े टूकड़े हो जाता है।

वह ज्यों उठता है तो देखता है कि उसका मोबाइल मेज पर पड़ा हुआ बज रहा है और घड़ी में बारह बज रहे है। उसका दिमाग चकरा जाता है। वो घबरा जाता है कि उसके साथ ये क्या हो रहा है। वो तो अभी फ़ोन पर बात कर रहा था
होता यूं है कि वो जब काम से वापस आता है तो सोफे पर पड़ते ही जूते निकालते निकालते सो जाता है और ये बातचीत सपने में हो रही होती है और अब जाकर उसकी नींद खुली है।

वह ज्यों ही फ़ोन उठाता है तो दूसरी तरफ से वही भारी आवाज फिरसे बोलना शुरू करती है जो सपने में उससे बात कर रही होती है- “मेरे सवाल का अगर तुमने सही जवाब दिया तो तुम्हारी जिंदगी बदल जाएगी।” इतना सुनना था कि जितेन के होश उड़ गए। क्योंकि पिछले एक हफ्ते से उसको यह व्यक्ति रोज रात के बारह बजे फोन कर रहा है।

जितेन चिढ़ते हुए गुस्से में बोलता है – ” भाई मैं एक हफ्ते से तुम्हारे सवालों के जवाब दे रहा हूँ। तुम जो सवाल पूछ रहे हो वो तो किसी स्कूल में भी नही पढ़ाया जाता है। तुम कौन हो? तुम्हारा उद्देश्य क्या है?

तुम पूछते हो- “हाथी और कुत्ते की लड़ाई में कौन जीतेगा?” मैं कहता हूँ भाई हाथी का लड़ना समझ में आता है लेकिन कुत्ता वो लड़ाई क्यों लड़ेगा जो उसके लिए जितना असंभव हो। और वैसे भी इनकी कोई जातीय दुश्मनी तो है नहीं।
तुम पूछते हो- “ऊँट पर बैठे इंसान को कुत्ता कैसे कटेगा?” अरे भाई! दाँत से कटेगा वो तलवारबाजी थोड़ी जानता है।
तुम पूछते हो – “कुत्ता हड्डी क्यों चबाता है?” अरे भाई ! कुत्ता हड्डी नही चबाता है। वो हड्डी से घिसकर अपने दाँत तेज करता है, जिससे अगर तुम्हारे जैसा कोई कुत्ता उसका दिमाग चबाना चाहे तो उसको सबक सिखाए।
यह बताओ तुमको कुत्तो में इतनी रूचि क्यों है?

दूसरी तरफ से वही भारी आवाज और भी गंभीरता से आई – “शाँत…… आज तुम्हारे लिए ये मेरा आखिरी सवाल है। अगर इसका सही जवाब दिया तो तुम्हारी भाग्यरेखा चमक उठेगी। क्या तुम तैयार हो?” जितेन अनमने मन से अपनी स्वीकृति स्वरूप लंबा सा हाँ….. बोल देता है।

दूसरे तरफ से आवाज आती है; तो ध्यान से सुनो – “मान लो अगर किसी कुत्ते को पर (पंख) लग जाए तो क्या करना चाहिए? उसकी पूँछ काट देनी चाहिए या गले मे पट्टा डाल देना चाहिए।”

ज्यों ही जितेन सवाल सुनता है; उसका चेहरा तमतमा जाता है। जितेन चीख पड़ता है- “कुत्ता ! कुत्ता ! कुत्ता ! अब मै इसका जवाब नही दूँगा। अब तुम बताओ; कुत्ता कुत्ते की मौत क्यों मरता है? इंसान कुत्ते की औलाद कैसे हो सकती है? तुम इंसान के रूप में कुत्तेश्वर हो क्या? क्या तुम कुत्ते की तरह…..

दूसरी तरफ की आवाज जितेन की आवाज बीच मे ही काटकर और भारी आवाज में बोलती है- शाँत……

उसकी आवाज सुनकर जितेन अपने आप को संभालते हुए और अपने को सामान्य करते हुए बोलता है – ” भाई मैं हिंसा में विश्वास नही रखता, इसीलिए कुत्ते की पूंछ काटने की बजाए मैं उसको पट्टा पहनना चाहूंगा।” जवाब देने के बाद जितेन फिर से अपना संतुलन खोते हुए चीखकर बोला – ” हाँ भाई! खोल दिया मेरी किस्मत का ताला, बना दिया मुझे बादशाह। इन बेकार सवालो का कोई मतबल भी है?”

दूसरी तरफ से आवाज आई – आज तुमने कुत्ते के गले मे पट्टा पहनाया है। कल तुम्हारे गले मे भी पट्टा पहनाया जाएगा” जितेन जवाब सुनकर अवाक रह गया। इसके बाद टूँ टूँ करके फ़ोन कट गया।

मेज पर पड़ी डिजिटल घड़ी में सुबह के 10 बज रहे है। जितेन सोफे पर सो रहा है। खिड़की से छनकर आ रही सूरज की तेज धूप से जितेन पसीने से तर-बतर हो गया है। करवट बदलते ही वो धड़ाम से नीचे गिर पड़ता है। उसकी नींद टूट जाती है। वो आँखे मींचते हुए उठता है और अपने चारों तरफ देखता है। उसके दोनों पैरों में जूते हैं। फूलदान भी एकदम ठीक ठाक है। वो सिर पकड़ कर बैठ जाता है और बड़बड़ाता है- “आज फिर से वही बुरा सपना।” तभी मेज पर पड़े मोबाइल की घंटी फिर से बज उठती है।

मोबाइल पर बॉस का नंबर फ़्लैश हो रहा है। बॉस का नंबर देखते ही जितेन एकदम सतर्क हो जाता है। उसकी सारी निद्रा और आलस्य उड़न छू हो जाती है।जितेन फ़ोन उठाकर अपने बॉस का अभिवादन करता है। उधर से उसके बॉस का जवाब आता है – ” जितेन! तुम्हारे मेहनत और प्रगति (परफॉरमेंस) को देखते हुए मैनेजमेंट ने तुम्हे पट्टा पहनाने…. ओह सॉरी, प्रमोट करने का निर्णय लिया है।
जितेन स्तब्ध होकर शून्य में देखता रह जाता है।

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© Arvind Maurya

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