माना क्यूँ ।

कहा था मैंने मान लिया मेरी गलती है।

पर तूने क्यों मान लिया तेरी गलती है।

क्यों न जानना चाहा तूने क्या सच्ची है।

मैने तुझसे बात जो यो ही कह रखी है।

बिना ज्ञान के बात मानना दोष है तेरा।

बिना जाँच के राह पे चलना खोट है तेरा।

तू जो चाहे दिल से मुझको बक सकता है।

खोटा सिक्का, झूठा कुछ भी कह सकता है।

पर जो मान्यता थी तेरी तुझपर यों हावी।

वही पड़ी है आज तेरे जीवन पर भारी।

जिसने कहा जो मान लिया,

सत्य का न पहचान किया।

सीधी खोपड़ी होने पर भी,

बुद्धि का अपमान किया।

खुदकी गिरेबां नही झाँकत,

मुझपर उँगली तान दिया।

______________________________________

© Arvind Maurya

Advertisements

4 thoughts on “माना क्यूँ ।

  1. JayParkhe

    🙏🙏🙏*विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय,*
    *लम्बोदराय सकलाय जगत्‌ हिताय ।*
    *नागाननाय श्रुतियज्ञभूषिताय,*
    *गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते ॥*
    🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
    विघ्नेश्वर,वर देने वाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओं से परिपूर्ण, जगत् का हित करनेवाले, गज के समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को वंदन व नमन है।

    🌺श्री गणेश चर्तुथी के पावन अवसर पर आप सभी को सपरिवार हार्दिक मंगलकामनाऐं ।ऊँ गं गणपतेय नमः …..👏👏

    Liked by 2 people

    Reply
    1. ARVIND MAURYA Post author

      आपका हृदय से बहुत बहुत आभार कि आपने मेरी रचनाओं को पढ़ा, सराहा और सुंदर प्रतिक्रिया दी। आप ने कविता के भाव को समझा इससे बड़ी खुशी की बात मेरे जैसे नौसिखिया लेखक के लिए और क्या हो सकती है। एक बार आपका पुनः बहुत बहुत धन्यवाद।

      Like

      Reply

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s