थोड़ा कम खाएंगे,थोड़ा गम खाएंगे।

तु जो कुछ बोल देती तो

दिल जो खोल देती तो

तो मैं जान ये पाता

मुझसे हुई क्या ख़ता।

दिल को ऐसे ना जला

मुझको ऐसे ना सता

कुछ तो बोल के तू जा

कुछ भी बोल के तू जा।

मैं तो सच हूँ बोलता

तूने कसम है जो दी।

मैं तो कसम भी न दूँ

तूने कसम है ये दी।

तूने आँख जो घूरी

दिल पर चल गई छूरी।

तेरे हाथ की थपकी से

हिल गई मेरी धरती।

तेरा नथुनों को फुलाना

मेरी साँस चढ़ाता।

तेरा यो तमतमा जाना

मेरी देह जलाता।

तू जो लट को उमेठे

तो मेरी कमर है चटके।

तूने जो दाँत है पीसा

तो करम मेरा है फूटा।

थोड़ा सा ओठ तो हिला

जरा सी जीभ लपलपा

खुल कर बात तो बता

मुझको ऐसे न उलझा।

कहीं वो बात तो नही

तूने दिल मे है धरी

जिसको हल्के-फुल्के में

मैंने कही थी कभी।

कहीं मेरा देर से आना

बिन बतलाए ही जाना

कहीं लगता हो ना गलत

कोई पालो न तुम भरम।

क्या मैं तुमको बताता

दौड़े कहाँ हूँ जाता।

मेरा काम है ऐसा

खच्चर गधे के जैसा।

जब भी बॉस बुलाता

दौड़े दौड़े हूँ जाता।

मुझको काम है बड़े

धैर्य जाया न धरे।

ज़ाया समय न करो

मुझको अलविदा कहो।

थोड़ी मुस्कान को धरे

भाव तंज से भरे

भंग मौन था किया

कहा अरे! अरे! अरे!

तुम तो आदमी बड़े

कितने काम है पड़े

तुम बिन सूर्य न चले

तुम बिन वायु न बहे

तुम ही सूर्य जगाते

तुम ही रात हो लाते

तुमसे चाँद है रौशन

खिलाते कलियों से चमन

तुमसे पवन की गति

नदियाँ कल कल बहती

रूप ऐसा देखकर

दाँत थोड़ा फाड़कर

पति बोला जी नही

ऐसा कुछ भी नही

उसकी बात काटकर

फिरसे गई वो बिफर

कोई हस्ती नही

फिर भी फुर्सत नही।

क्या किया है जी आज

क्या करोगे जी कल

कल भी थे जी यहीं

कल भी होंगे इधर

कहीं जाना नही

फिर क्यों इतनी ऊधम

माँ की कोख से निकल

लेना भूमि में शरण।

सबका जीवन यही

इतनी गाथा रही

शुरू जीवन यहीं

और खतम भी यही।

पल जो कुछ है मिले

इसके बीच के बचे

आओ इसको जिए

थोड़ी राहत लिए।

ना हो ज्यादा की चाह

ना हो दूजो से द्वेष

कर्म इतना करे

कि हम दान दे सके

लोभ-लालच के जाल में

हम क्यों फँसे।

काम ऐसा भी क्या

जिसमे फुर्सत न हो

चिपके ऐसे रहे

जैसे जीवन ये हो

छोड़ दो जी वो काम

जिसमे है ना आराम

जिसमे चैन है नही

चिंता घर कर गई।

थोड़ा कम खाएंगे

थोड़ा गम खाएंगे

थोड़ा कम पहनेंगे

थोड़ा कम चमकेंगे

थोड़े साधन में भी

जीवन जी जाएंगे

लेकिन साथ ये अपना

कभी ना छोड़ेंगे।

लेकिन प्यार ये अपना

कम ना होने देंगे।

तुमसे बात थी इतनी

मुझको कहनी प्रिये

मुझे ना है शिकवा

ना है कोई गीले।

आँखों मे दोनो के

पानी भर था गया

दिल से की थी जो बात

दिल को था उतर गया।

दिल को दिल से मिला

था आलिंगन किया

धड़कने थी मिली

मन भी था मिल गया।

अब ना शिकवा रहा

ना ही कोई गिला

दिल से दिल मिल गए

मन से मन मिल गया।

______________________________________

© Arvind Maurya

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